Veto Power Kya Hai? वीटो पावर कितने देशों के पास है?

Veto Power Kya Hai: वीटो पावर के बारे में अपने कभी ना कभी जरूर सुना होगा, कुछ लोगो को वीटो पावर के बारे में जानकारी होती है लेकिन अधिकतर इंसानो को वीटो पावर के बारे में जानकारी नहीं है| जब से रूस और यूक्रैन के बीच युद्ध शुरू हुआ है तब से वीटो पावर काफी ज्यादा चर्चा में रहा है, अगर आपको वीटो पावर के बारे में जानकारी नहीं है तो हमारे इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें क्योंकि आज हम वीटो पावर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जैसे वीटो पावर क्या है? वीटो पावर का इतिहास, पहली बार वीटो का इस्तेमाल कब किया गया था? और वीटो पावर कैसे मिलती है? इत्यादि के बारे में बताने वाले है| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थाई सदस्य देश और 11 स्थाई सदस्य देश मौजूद है, वीटो पावर का इस्तेमाल किसी भी प्रस्ताव को पास करने से रोकने के लिए किया जाता है| आसान भाषा में समझे तो मसूद अजहर के बारे में तो आप सभी अच्छी तरह से जानते ही होंगे संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद् में मसूद अजहर के खिलाफ एक प्रस्ताव रखा गया लेकिन इस प्रस्ताव के खिलाफ चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया जिसकी वजह से अजहर महमूद के खिलाफ प्रस्ताव पास नहीं हुआ है| चलिए अब हम सबसे पहले वीटो पावर क्या है (veto power kya hai) इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है

वीटो पावर क्या है? (veto power kya hai)

वीटो पावर को संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा बनाया गया एक विशेष अधिकार नियम कह सकते है| संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा किसी भी प्रस्ताव को पास करने से रोकने के अधिकार को वीटो पावर कहा जाता है, दरसल संयुक्त राष्ट्र संघ के फिलहाल पांच स्थाई देश सदस्य है और उन पांचो देशो के पास वीटो पावर मौजूद है| वीटो शब्द लेटिन भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है मै मना करता हूँ| इसीलिए अगर कोई भी वीटो पावर वाला देश किसी भी प्रस्ताव पर वीटो पावर का इस्तेमाल करता है तो उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया जाता है| चलिए अब हम आपको वीटो पावर के इतिहास के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है          

वीटो पावर का इतिहास

ऊपर आपने वीटो पावर के बारे में जानकारी प्राप्त की, काफी सारे लोगो के मन में यह सवाल भी रहता है की वीटो पावर की शुरुआत कब हुई थी? या वीटो पॉवर का इतिहास क्या है? दरसल वर्ष 1945 में यूक्रेन के शहर याल्टा में एक समारोह का आयोजन किया गया था, जिसका नाम याल्टा सम्मेलन या क्रीमिया सम्मेलन था| याल्टा सम्मेलन में सोवियत संघ के प्रधानमंत्री Joseph Vissarionovich Stalin ने वीटो पावर का प्रस्ताव रखा था। याल्टा समारोह में इंग्लैंड के प्रधानमंत्री Sir Winston Leonard Spencer Churchill और सोवियत संघ के प्रधानमंत्री Joseph Vissarionovich Stalin और अमेरिका के राष्ट्रपति Franklin D. Roosevelt ने हिस्सा लिया था| वर्ष 1920 में लीग ऑफ़ नेशन की स्थापना की गई थी, जिसमे चार स्थायी एवं चार अस्थायी सदस्यों को विशेषाधिकार प्राप्त थे| लीग ऑफ नेशन के चार स्थाई सदस्य अमेरिका, चीन, ब्रिटेन और रूस थे| लीग ऑफ़ नेशन के बाद वीटो पावर आस्तित्व में आने के समय पर भी चार स्थायी एवं चार अस्थायी सदस्य थे, फिर बाद में आस्था सदस्यो की संख्या चार से बढ़कर 11 हो गई थी|

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पहली बार वीटो का इस्तेमाल कब किया गया था ?

काफी लोगो को यह जानकारी नहीं होती है की वीटो पॉवर का इस्तेमाल सबसे पहले कब हुआ था? दरसल 16 फरवरी वर्ष 1946 में पहली बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया गया था और पहली बार वीटो पावर का इस्तेमाल सोवियत समाजवादी गणराज्य ने लेबनान और सीरिया में से विदेशी सैनिकों की वापसी के लिए किया था| वर्ष 1946 से लेकर अब तक वीटो पावर का इस्तेमाल लगभग 291 बार हो चूका है, वीटो पावर का इस्तेमाल अब तक सबसे ज्यादा सोवियत रूस ने किया है| भारत के स्वतंत्र होने के बाद वर्ष 1970 में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पावर देने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उस समय भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने वीटो पावर की सदस्यता लेने से साफ़ मना कर दिया था इसके आलावा उन्होंने चीन को वीटो पावर की सदस्यता ना देने की बात भी कही थी, लेकिन चीन को वीटो पावर दे दी गई थी|

अब तक वीटो पावर को कितनी बार इस्तेमाल किया गया है ?

वीटो पावर की स्थापना से लेकर अब तक बहुत बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया जा चूका है, वीटो पावर की सुरक्षा परिषद् के 5 स्थायी सदस्यों ने कई बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है, कौन से देश ने कितनी बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है इसके बारे में हम आपको नीचे जानकारी दे रहे है

सोवियत रूस  – वीटो पावर की स्थापना से लेकर अब तक रूस ने आने देशो के मुकाबले सबसे ज्यादा वीटो पावर का इस्तेमाल किया है, रूस ने लगभग 146 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है| रूस ने भारत के लिए भी कई बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है, वर्ष 1960 में कष्मीर मुद्दे पर भारत के समर्थन में रूस ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया था, वर्ष 1961 में गोवा को आजाद करने के प्रस्ताव में भी रूस ने भारत का समर्थन करते हुए वीटो पावर का इस्तेमाल किया था। इसके आलावा भी कई बार रूस ने भारत के समर्थन में अनेको बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया था|

अमेरिका – रूस के बाद सबसे ज्यादा वीटो पावर का इस्तेमाल अमेरिका ने किया था, वर्ष 1970 में अमेरिका ने अपना पहला वीटो पावर का इस्तेमाल करा था। वर्ष 1970 से लेकर अब तक अमेरिका ने लगभग 82 वीटो पावर का इस्तेमाल कर चुका है।

यूनाइटेड किंगडम – वीटो पावर इस्तेमाल करने की लिस्ट में तीसरे नंबर है यूनाइटेड किंगडम, यूनाइटेड किंगडम ने वर्ष 1956 में स्वेज संकट के समय पहली बार वीटो पावर का इस्तेमाल करा था, तब से लेकर अब तक यूके लगभग 32 बार वीटो पावर का इस्तेमाल कर चूका है|

फ्रांस – वीटो पावर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले देशो की लिस्ट में चौथा नाम है फ़्रांस, फ़्रांस ने सबसे पहला वीटो पावर का इस्तेमाल वर्ष 1946 में स्पेनिश प्रश्न के संबंध में इस्तेमाल करा था, तब से लेकर अब तक फ्रांस लगभग 18 वीटो पावर का इस्तेमाल कर चूका है|

चीन – वीटो पावर इस्तेमाल सबसे ज्यादा करने वाले देशो की लिस्ट में सबसे आखिरी नाम आता है चीन का, चीन ने वीटो पावर की स्थापना से लेकर अब तक केवल 18 वीटो पावर का इस्तेमाल किया है| आतंकवादी अजहर महमूद के लिए भी चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल किया था|

वीटो पावर कैसे मिलती है ?

ऊपर आपने वीटो पावर के सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले देशो के बारे में जाना, चलिए अब हम आपको बताते है की किसी देश को वीटो पावर कैसे मिलती है? दरसल वीटो पावर पाने के दो तरीके होते है, चलिए अब हम आपको दोनों तरीको के बारे में बताने जा रहे है| वीटो पावर पाने का पहला तरीका है की वीटो पावर में फिलहाल 15 देश सदस्य है, सुरक्षा परिषद् में शामिल 15 देशो में 5 देश स्थायी सदस्य और शेष 10 देश इस सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में मौजूद है| जिस देश को वीटो पावर दी जाती है उसका कार्यकाल 2 साल का होता है, किस देश को वीटो पावर दी जाएगी इसका निर्णय पूर्ण रूप से सुरक्षा परिषद् के सदस्य देशों पर निर्भर करता है। यह तो आप समझ ही गए की सुरक्षा परिषद् में 15 देश शामिल है, ऐसे में किस देश को वीटो पावर देनी है इसके लिए वोटिंग प्रक्रिया की जाती है, वीटो पावर पाने वाले देश के पक्ष में कम से कम 9 सदस्य देशों की अनुमति मिलनी जरुरी है| लेकिन खास बात यह है की वीटो पावर पाने वाले देश के पास 5 स्थाई सदस्य देश और 4 अस्थाई सदस्य देश की अनुमति मिलनी बहुत जरुरी है| अगर किसी भी देश के पास पांचो स्थाई सदस्य देश की अनुमति नहीं है तो उसे वीटो पावर नहीं दी जा सकती चाहे उसके पास समस्त अस्थाई सदस्य देशो की अनुमति क्यों ना हो| वीटो पावर पाने की दूसरा तरीका यह है की वीटो पावर पाने वाले देश के पास बहुत ज्यादा धन-सम्पदा होनी चाहिए, जिससे वीटो पावर पाने वाला देश विभिन्न देशों की सुरक्षा में भरपूर सहयोग कर सके|

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सुरक्षा परिषद् में कोई प्रस्ताव कितनी बार पेश किया जा सकता है?

ऊपर आपने जाना की किसी भी देश को वीटो पावर कैसे दी जाती है? अब हम आपको बताते है की सुरक्षा परिषद् में किसी प्रस्ताव को कितनी बार पेश किया जा सकता है? जब सुरक्षा परिषद् में कोई प्रस्ताव आता है तो वो प्रस्ताव तभी पास होगा जब उस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद् के पांचो स्थाई सदस्य देश अनुमति प्रदान करते है| अगर उस प्रस्ताव पर पांचो स्थाई सदस्य देशो में से किसी भी एक देश ने उस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो पावर का इस्तेमाल किया तो वो प्रस्ताव तुरंत निरस्त हो जाता है| सुरक्षा परिषद् में एक प्रस्ताव केवल तीन बार पेश किया जा सकता है और उस प्रस्ताव पर तीन बार वीटो पावर का इस्तेमाल होता है तो उस प्रस्ताव को हमेशा के लिए निरस्त कर दिया जाता है अर्थात वो प्रस्ताव भविष्य में कभी भी सुरक्षा परिषद् में पेश नहीं होता है|

वीटो पावर कितने देशों के पास है?

वर्तमान समय में वीटो पॉवर केवल पांच देशो के पास है और वो पांचो देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य है| वीटो पावर रखने वाले देशो के नाम है – संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, चीन,  फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम|

वीटो पॉवर का उद्देश्य

काफी सारे लोगो के मन में यह सवाल भी रहता है की आखिर वीटो पॉवर का उद्देश्य क्या है? दरसल सुरक्षा परिषद् का निर्माण विश्व में शान्ति और सुरक्षा की स्थापना करने के लिए किया गया था और वीटो पावर का इस्तेमाल किसी बड़े मानवीय संकट और युद्ध को टाला जा सके और युद्ध की जगह बातचीत के द्वारा हल निकालने के लिए किया जाता है| उदाहरण के तौर पर समझे तो रूस और यूक्रैन के युद्ध के बारे में तो आप अच्छी तरह से जानते ही होंगे, रूस ने यूक्रैन पर हमला करने के बाद काफी सारे देश और संयुक्त राष्ट्र संघ इसका विरोध कर रहे है| हमले को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में निंदा प्रस्ताव रखा गया था लेकिन अभी तक यह प्रस्ताव पास नहीं हो पाया है इसका सबसे बड़ा कारण यह है की रूस सुरक्षा परिषद् का स्थाई सदस्य देश है और बिना उसकी अनुमति के कोई भी प्रस्ताव पास नहीं हो सकता है| रूस की जगह किसी और देश ने ऐसा हमला किया होता तो अब तक नींद प्रस्ताव पास हो चुका होता और उस देश के खिलाफ बहुत सारे कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए जाते|  

भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा वीटो पावर का इस्तेमाल किस देश ने किया है?

भारत के खिलाफ सबसे ज्यादा वीटो पावर का इस्तेमाल करने वाले देश का नाम है चीन, वर्तमान में भारत के दुश्मन देशो पर नजर डालें तो केवल दो देश ही नजर आते है पहला है पाकिस्तान और दूसरा है चीन| पकिस्तान के पास वीटो पावर है नहीं लेकिन चीन के पास वीटो पावर मौजूद है, चीन ने भारत के खिलाफ पहली बार मंगोलिया को UNO में सदस्यता के खिलाफ किया था और इसके बाद वर्ष 1972 में बांग्लादेश निर्माण के समय भारत के खिलाफ वीटो पावर का इस्तेमाल करा था|

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भारत को वीटो पावर कैसे मिलेगी ?

देश में रहने वाले अधिकतर इंसान चाहते है की भारत को भी वीटो पावर मिलें लेकिन भारत के लिए वीटो पावर पाना आसान नहीं है| दरसल भारत फिलहाल सुरक्षा परिषद् का अस्थाई सदस्य के रूप में शामिल है और भारत लगातार स्थाई सदस्य बनाने की कोशिश कर रहा है| संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थाई सदस्य बनने के लिए भारत के पास पांचो स्थाई देशो का समर्थन प्राप्त होना जरुरी है फिलहाल भारत को रूस, फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन का समर्थन तो मिल चुका है लेकिन पांचवा स्थाई सदस्य देश चीन इस मुद्दे पर भारत समर्थन नहीं कर रहा है। जब तक संयुक्त राष्ट्र परिषद् के पांचो स्थाई देश समर्थन नहीं करते है तब तक भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थाई सदस्य नहीं बन सकता है, इस स्थिति में यह कह पाना बहुत ज्यादा मुश्किल है की भारत को वीटो पावर कब तक मिलेगी| फिलहाल जिस तरह से भारत और चीन के बीच में दुश्मनी चल रही है उस हिसाब उम्मीद नहीं है की कभी चीन भारत को वीटो पावर मिलने का समर्थन करेगा| भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ अपने नियमो में कुछ बदलाव करता है तो भारत संयुक्त राष्ट्र संघ का स्थाई सदस्य जरूर बनता हुआ नजर आ सकता है।

वीटो पावर की आलोचनाएं या कमियां

सुरक्षा परिषद् का निर्माण होने के बाद काफी सारी कमियां पाई गई, किसी भी देश के द्वारा वीटो पॉवर का इस्तेमाल किसी भी प्रस्ताव को रोकने के लिए किया जाता है, सुरक्षा परिषद् की कार्यप्रणाली तथा ढाँचे को लेकर कई बार कई देशो ने आलोचना भी की है, चलिए अब हुमक आपको सुरक्षा परिषद् की कुछ कमियों के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है

1 – सुरक्षा परिषद् का निर्माण उन देशो ने किया था जो दूसरे विश्व युद्ध के समय सबसे शक्तिशाली देश थे, लेकिन आज सभी देशो की स्थितियों में काफी ज्यादा बदलाव आ गया है, लेकिन वीटो पावर की कंडिशनो में कुछ बदलाव नहीं किए गए है, आज भी भी सुरक्षा परिषद् के स्थाई सदस्य देश सिमित है|

2 – काफी सारे आलोचकों का कहना है की सुरक्षा परिषद् के निर्माण के समय ब्रिटैन और फ़्रांस शक्तिशाली देश थे, लेकिन आज के समय कई देश ऐसे है जो सैनिक और आर्थिक आधार पर दोनों देशो के बराबर या ज्यादा है तो ऐसी स्थिति में उन शक्तिशाली देशों को भी वीटो पावर मिलनी चाहिए|

3 – काफी सारे मामलो में ऐसा देखने को मिला है, वीटो पावर रखने वाले देश इसका इस्तेमाल विश्व शान्ति और सुरक्षा के लिए ना करके आपसी हितों के लिए करते हुए दिखाई देते है| ऐसे में सुरक्षा परिषद् की इस प्रणाली को खत्म करके सुरक्षा परिषद के फैसले बहुमत के आधार पर होने चाहिए|

4 – सुरक्षा परिषद् में ऐसी कई सारी कमियां होने के बाद भी और कई बार आलोचना होने के बाद भी वीटो पावर में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है| सुरक्षा परिषद् में किसी तरह का बदलाव करने के लिए पाँचों वीटो पावर रखने वाले स्थाई देशों की सहमती जरुरी है| 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है ?

संयुक्त राष्ट्र संघ का नाम सभी ने जरूर सुना होगा दरसल संयुक्त राष्ट्र संघ एक अंतराष्ट्रीय संगठन के रूप में जाना जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की 6 सहयोगी संस्था है, जिनमे से एक का नाम है संयुक्त सुरक्षा परिषद्, आपको बता दें की संयुक्त सुरक्षा परिषद् की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी| संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश सदस्य के रूप में शामिल है, जिनमे से पांच स्थाई सदस्य देश और 10 अस्थायी सदस्य देश मौजूद हैं, प्रत्येक स्थाई सदस्य के पास वीटो पावर होती है|

निष्कर्ष –

हम आशा करते है की आपको हमारे लेख वीटो पावर क्या है? (veto power kya hai) और वीटो पावर का इतिहास में दी गई जानकारी पसंद आई होगी, अगर आपको हमारे द्वारा दी गई गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे इस लेख को अधिक से अधिक शेयर करने की कोशिश करें, जिससे हमारा यह पेज ऐसे लोगो के पास तक पहुँच जाएं जिन्हे वीटो पावर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है|

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