Bhasha Kise Kahate Hain? भारत की राष्ट्र भाषा क्या है?

Bhasha Kise Kahate Hain: हर एक इंसान कोई ना कोई भाषा जरूर बोलता और समझता है, हालाँकि कुछ लोग कई तरह की भाषा को बोलते और समझते भी है| लेकिन भाषा के बारे में जानकारी काफी कम लोगो को होती है, अगर आप किसी भी इंसान से पूछे की भाषा क्या है तो शायद आपको सही और सटीक जवाब ना मिले| अगर आपको भी भाषा के बारे में जानकारी नहीं है तो हमारा यह लेख आपके लिए फायदेमंद साबित होने वाला है क्योंकि आज हम अपने इस लेख में भाषा से सम्बंधित महत्पूर्ण जानकारी दे रहे है| जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो उस समय उसे ना तो बोलना आता है ना लिखना आता है और ना ही पढ़ना आता है, फिर धीरे धीरे बच्चा अपने माँ बाप और आस पास के लोगो की बातो और शब्दों को सुनकर बड़ा होता है| जो शब्द और भाषा बच्चा सुनता है फिर वो ही भाषा वो बोलने लगता है| इस तरह की भाषा को मातृ भाषा कहा जाता है और मातृ भाषा को सिखने की जरुरत नहीं पढ़ती है| लेकिन अगर आपको किसी दूसरी भाषा के बारे में जानना है तो पहले आपको उस भाषा को पढ़ना, बोलना और लिखना आना चाहिए| चलिए अब हम आपको भाषा क्या है? (bhasha kya hai) के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है  

Table of Contents

भाषा क्या है (Bhasha kya hai)? / Bhasha kise kahate hain? / Bhasha ki paribhasha

भाषा उस साधन को कहा जाता है जिसकी मदद से इंसान बोलकर या लिखकर या पढ़कर या सुनकर अपने विचारो या भावों का आदान प्रदान करता है। सरल भाषा में समझे तो जब कोई भी इंसान अपने भाव या विचार को बोलकर लिखकर बताता है तो इस साधन को भाषा कहा जाता है, आप ऐसे भी समझ सकते है जिस तरह से किसी इंसान को एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए इंसान को साईकिल, बाइक या बस इत्यादि असाधन की जरुरत होती है, इनमे से किसी भी साधन से इंसान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँच जाता है| बस यही काम भाषा का भी है एक इंसान के भाव या िचार को दूसरे इंसान के पास तक पहुंचाने का साधन भाषा है| चलिए अब हम आपको भाषा के प्रकारो के बारे बताते है 

भाषा के प्रकार

ऊपर आपने भाषा के बारे में जाना अब हम आपको भाषा के प्रकार के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है, भाषा के अलग अलग प्रकार होते है, जिनमे से प्रमुख प्रकारो के बारे में हम आपको नीचे बता रहे है

1 – मूक या सांकेतिक भाषा

मूक भाषा ध्वनि रहित भाषा होती है, इस प्रकार की भाषा में इंसान को संकेत या चिन्ह या स्पर्श के माध्यम से जानकारी दी जाती है और इस भाषा का इस्तेमाल मूक बाधिर इंसानो के लिए किया जाता है| मूक भाषा को भाषा का अव्यक्त रूप भी कहा जाता है| हालाँकि सांकेतिक या मूक भाषा का इस्तेमाल छोटे या नवजात शिशु के लिए भी किया जाता है|

2 – लिखित भाषा 

जब कोई इंसान अपने भाव और विचारो को किसी लिपि की मदद से लिखकर बताता है तो इसे लिखित भाषा कहा जाता है| लिखित भाषा को आप सबसे ज्यादा शक्तिशाली भाषा भी कह सकते है क्योंकि लिखित भाषा में लिपिबद्ध किया गया विचार शताब्दियों बाद पढ़ कर समझा और बताया जा सकता है, आसान भाषा में समझे तो आप आज अपने विचार या भाव लिख कर रख सकते है, आपके द्वारा लिखे गए विचार और भाव शताब्दियो तक सुरक्षित रहते है, आपके द्वारा लिखे हाव और विचार से आने वाली पीडियो को भी आज के बारे में जानकारी प्राप्त होती है| इसके अलावा लिखित भाषा का इस्तेमाल करके आप अपने लिपिबद्ध विचार या संदेश देश और विदेश के किसी भी स्थान पर आसानी से भेज सकते है| इसीलिए लिखित भाषा को सबसे बेहतर और शक्तिशाली रूप में जाना जाता है|

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3 – अस्पष्ट भाषा

अस्पष्ट भाषा उस भाषा को कहते है जो स्पष्ट या पूर्ण नहीं होती है, मान लीजिए कोई इंसान कुछ बोल रहा है, आपको यह तो पता चल रहा है की इंसान बोल रहा है लेकिन कया बोल रहा है यह जानकारी नहीं होती है तो इस प्रकार की भाषा को अस्पष्ट भाषा कहा जाता है| सुबह सुबह चिड़िया चहकती है, इस स्थिति में इंसानो को चिड़ियो के बोलने की आवाज तो आती है लेकिन उनकी भाषा समझ में नहीं आती है, इसीलिए जानवरो की भाषा इंसान के लिए अस्पष्ट भाषा है।

4 – स्पष्ट भाषा

आपको इस भाषा के नाम से ही अंदाजा लग रहा होगा की जब किसी भी भाषा में इंसान के भाव पूर्ण रूप से स्पष्ट होने के साथ साथ सामने वाले इंसान को पूर्ण रूप से समझ में आए उसे स्पष्ट भाषा कहते है| स्पष्ट भाषा मानव व्यवहार और उसकी उन्नति में सर्वाधिक सहयोगी मानी जाती है|

5 – स्पर्श भाषा

स्पर्श भाषा का उपयोग ऐसे इंसानो के लिए किया जाता है जो देख और सुन नहीं सकते है, ऐसे में इंसान को स्पर्श करा कर चीजे और बातो को समझाया जाता है| स्पर्श भाषा में शरीर के एक अथवा अधिक अंगों के स्पर्श के माध्यम से जानकारी दी जाती है और इस भाषा को समझाने के लिए भाषा के प्रयोगकर्ता और ग्रहणकर्ता में निकटता होना बहुत ज्यादा जरुरी है, अगर दोनों के बीच में दुरी ज्यादा होती है तो कुछ भी समझाना मुश्किल या नामुमकिन होता है|

6 – इंगित भाषा

इस प्रकार की भाषा को समझाने के लिए विभिन्न प्रकार के संकेतों या चिन्हो की मदद ली जाती है| आसान भाषा में समझे तो आपने सिग्नल या रेलवे फाटक पर लाइट लगी हुई जरूर देखी होगी, जिसमे ग्रीन लाइट या हरी झंडी होने का मतलब है तो यह इंगित करता है की अब मार्ग साफ़ है आप आगे बाद सकते है दूसरी तरफ लाल लाइट मार्ग में अवरुद्ध होना या रुकने का संकेत देती है| इसके अलावा हाईवे पर आपने मुड़ने का निशान देखा होगा जिसका मतलब होता है की आगे मुड़ने का मार्ग दिया हुआ है|

7 – वाचिक भाषा

इस भाषा में मौखिक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, इस प्रकार की भाषा तब देखने को मिलती है जब इंसान एक दूसरे के सामने या पास मौजूद नहीं होते है| लेकिन फिर भी वो अपने भाव और विचारो का आदान प्रदान आसानी से कर सकते है, इस भाषा का सबसे अच्छे उदहारण है दूरभाष सेवा और वायरलेस इत्यादि|

भाषा का माध्यम

भाषा को व्यक्त करने के लिएअलग अलग माध्यम होते है, चलिए अब हम आपको भाषा के माध्यमो के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है

1 – अभिव्यक्ति के माध्यम से

किसी भी इंसान के भाव और विचारो को दूसरे इंसान तक पहुंचाने के लिए अभिव्यक्ति का माध्यम सबसे बेहतर होता है, इसमें इंसान अपने विचारों, भावों, इच्छाओं और आकांक्षाओं को दूसरे इंसान पर जाहिर करने के साथ साथ दूसरे इंसान के विचार, भाव और इच्छाओं को सुन और समझ भी सकता है| आमतौर पर भाषा के इस माध्यम का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है|

2 – चिन्तन मनन के माध्यम से 

किसी भी इंसान के लिए सुनना, बोलना, पढ़ना या लिखना पर्याप्त नहीं होता है बल्कि इंसान जो भी पढता, लिखता और सुनता है उसके बारे में खुद चिन्तन मनन जरूर करना चाहिए| यह तो आप अच्छी तरह से जानते होंगे की भाषा को विचारों का मूल-स्रोत कहा जाता है और बिना विचारो के भाषा का कोई अस्तित्व नहीं होता है|

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3 – संस्कृति के माध्यम से

यह तो आप जानते ही होंगे की संस्कृति और भाषा की प्राप्ति परम्परा से होती हैं, समाज में रहने वाले लोगो के क्रिया कलापों से ही संस्कृति का निर्माण होता है| सास्कृतिक प्रोग्रामो के बारे में बताने के लिए भाषा का उपयोग किया जाता है, पौराणिक और साहसिक कहानियाँ, पर्व और त्यौहार, लोक कथाएँ, महान विभूतियों की कार्यावली और राष्ट्रप्रेम इत्यादि सांस्कृतिक गतिविधियों का असर भी भाषा पर दिखाई देता है| अगर आप किसी समुदाय या उस समुदाय के सांस्कृतिक गतिविधियों के बारे में जानने के लिए आपको उस समुदाय की भाषा को समझना बहुत ज्यादा जरुरी है, अगर आप उस समुदाय की भाषा को नहीं समझते है तो आप उस समुदाय के बारे सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं कर सकते है|

भाषा के कार्य

ऊपर आपने भाषा के माध्यम के बारे में जानकारी प्राप्त की, काफी सारे लोगो के मन में यह सवाल रहता है की आखिर भाषा के कार्य क्या होते है, भाषा के कार्य के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है 

1 – इंसान को अपने विचार और अनुभव को सांझा करने के लिए भाषा की जरुरत पड़ती है, भाषा की मदद से हम आसानी से अपने विचार और अनुभव को आसानी से सांझा कर सकते है और दूसरो के विचार और अनुभव को सुन और समझ सकते है| 

2 – कुछ कार्यो में भाषा का उपयोग कुछ क्रियाओं या प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करने के लिए भी होता है, जैसे कमांड देना या आदेश करना|

3 – सामाजिक नियंत्रण एवं पारस्परिक संपर्क करने के लिए भी भाषा का उपयोग किया जाता है|

4 – भाषा का उपयोग हर स्थिति में किया जाता है, इंसान की भाषा जरूरतों के अनुसार होती है|

5 – कवि और लेखक अपनी रचनाओं में शब्दों और वाक्यों का उपयोग बेहतरीन तरीके से करते है, लेखक और कवि कम शब्दों में अपनी बात कह देते है|

6 – सामाजिक पृष्ठ भूमि और दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए भी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है| 

भाषा के अंग

चलिए अब हम आपको भाषा के अंग के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है 

1 – भाषा का अंग है ध्वनि या आवाज

ध्वनि को भाषा का प्रमुख अंग माना जाता है, इंसान के मुंह से निकलने वाली प्रत्येक आवाज को ध्वनि कहा जाता है, इंसान के मुख से निकलने वाली ध्वनियाँ हमेशा मौखिक भाषा में इस्तेमाल की जाती है| आप ऐसे भी समझ सकते है की इंसान की आवाज भाषा का इस्तेमाल करती हुई निकलती है|

2 – भाषा का अंग है वर्ण और शब्द

शायद ही कोई इंसान हो इसे वर्ण के बारे में जानकारी ना हो, वर्ण उस मूल ध्वनि को कहा जाता है जिसके टुकड़े ना नहीं किए जा सकते है| अ, क, न, म और ज इत्यादि वर्ण कहलाते है, वर्णो का ऐसा समूह जिसका कोई अर्थ या मतलब निकलता है तो उस समूह को शब्द कहा जाता है जैसे ज+ब= जब इत्यादि| 

3 – भाषा का अंग है वाक्य

वाक्य के बारे में सभी जानते ही है लेकिन अगर आपको वाक्य के बारे में जानकारी नहीं है तो हम आपको वाक्य के बारे में बताते है| वाक्य शब्दों का वो समूह होता है जिसका कोई ना कोई अर्थ जरूर निकलता है, अगर किसी भी शब्दों के समूह का कोई अर्थ नहीं निकलता है तो उसे वाक्य नहीं कहा जाता हैं।

4 – भाषा का प्रमुख अंग है लिपि

भाषा का एक प्रमुख अंग होता है, लिपि के बारे में आपने कभी ना कभी जरूर सुना होगा, अपने भाव और विचार को लिखित रूप में व्यक्त करने के लिए जिन चिन्हों का इस्तेमाल करा जाता है उन्हें लिपि कहा जाता हैं।

भाषा की प्रक्रिया

यह तो हम सभी अच्छी तरह से जानते है की भाषा संवाद या सम्प्रेषण का माध्यम होता है, इसीलिए भाषा की प्रक्रिया में मुख्य रूप से पाँच चरण सुनना, बोलना, देखना, लिखना और पढ़ना होते है|

1 – सुनना

अगर कोई इंसान सुन नहीं सकता है अर्थात बहरा है तो ऐसे इंसान के लिए भाषा को कोई महत्व नहीं होता है क्योंकि आप कुछ भी बोलें जब उसे सुनाई नहीं जाएगी तो वो आपकी बात नहीं समझ सकता है| इसके अलावा एक इंसान सुन सकता है लेकिन उस इंसान ने आपकी बात सुनी ही नहीं तो ऐसे इंसानो पर भी आपकी बात का कोई असर नहीं पड़ेगा| इसीलिए भाषा को प्रभावी बनाने के लिए सुनना सबसे ज्यादा महत्पूर्ण होता है, जब कोई इंसान आपकी भाषा को सुनता है तभी वो आपके द्वारा कही गई बातो को समझता है|

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2 – देखना

किसी भी दो इंसानो के बीच में संचार या सम्प्रेषण में जिस तरह सुनना बहुत ज्यादा जरुरी होता है उसी प्रकार देखना भी बहुत ज्यादा जरुरी होता है| जैसे मान लीजिए आप किसी भी इंसान को कुछ लिख कर समझा रहे है, इस स्थिति में वो इंसान जिसे आप समझाना चाह रहे है वो उस लिखे हुए को ना देखें तो वो कभी समझ नहीं सकता है| आसान भाषा में समझे तो गणित केसवालो को आप बिना देखे समझ नहीं सकते है, इसीलिए भाषा की प्रक्रिया को समझने के लिए देखना भी जरुरी है|

3 – बोलना

अगर आप किसी से कुछ बोलेंगे नहीं तो सामने वाला सुनेगा कैसे, अपने विचार या भाव को बताने के लिए बोलना जरुरी है| अगर आप संवाद या संचार को प्रभावशाली रूप से करना चाहते है तो आपको बोलना अति आवश्यक होता है, बोलनें के लिए इंसान को व्याकरण का ज्ञान होना जरुरी नहीं है लेकिन अपनी भाषा को प्रभावशाली बनाने के लिए व्याकरण का ज्ञान होना चाहिए। इंसान को पढ़ने लिखने से पहले बोलना सीखना होता है और बोलने के लिए आपको पढ़ना लिखना जरुरी नहीं है लेकिन अगर आपको सही से बोलना नहीं आता है तो आप सही से लिख है सकते है, इसलिए इंसान को सबसे पहले बोलना सीखना पढता है उसके बाद पढ़ना और लिखना| बोलना सबसे ज्यादा जरुरी है यह तो हम सभी अच्छी तरह से जानते है इसीलिए भाषा के प्रक्रिया में बोलना भी काफी ज्यादा महत्वूर्ण होता है|

4 – पढ़ना

भाषा की प्रमुख और जटिल प्रक्रिया है पढ़ना, किसी भी समुदाय, भाषा, वस्तु इत्यादि के बारे में उस चीज के बारे में पढ़ना बहुत ज्यादा जरुरी है| पढ़ने से आपको उस बारे में जानकारी प्राप्त होती है, जैसे आपको किसी ऐतिहासिक चीज के बारे में जानकारी करना चाहते है तो आपको उसके बारे में पढ़ना पड़ता है, पढ़ने से आपको उस चीज के बारे में जानकारी प्राप्त होती है|

5 – लिखना

हर एक इंसान को लिखना भी आना जरुरी है, कई बार इंसान को कुछ चीजे लिखकर समझानी पढ़ती है जैसे गणित के सवालों को आपको लिखकर समझाना पड़ता है| इसीलिए भाषा की प्रक्रिया में लिखना भी महत्वपूर्ण होता है|

दुनिया में कितनी भाषाएं बोली जाती है

काफी सारे लोगो के मन में यह सवाल रहता है की दुनिया में कितनी भाषाएं बोली जाती है तो हम आपको बता दें की दुनियाभर में 6800 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती है| दुनिया में केवल 24 प्रमुख भाषा है और आधी दुनिया इन प्रमुख भाषा को ही बोलती है, कुछ भाषा तो तो ऐसी है जिन्हे बोलने वाले इंसानो की संख्या 1000  से कम है| भारत में 650 से ज्यादा भाषाएं बोली जाती है|

बोली और भाषा में अन्तर क्या है ?

कुछ लोग यह सोचते है की बोली और भाषा एक ही होती है जबकि यह सच नहीं है असल में भाषा और बोली में काफी बढ़ा अंतर होता है| चलिए अब हम आपको भाषा और बोली में अनार के बारे में जानकारी उपलब्ध करा रहे है

1 – बोली के मुकाबले भाषा का क्षेत्र बहुत ज्यादा बड़ा होता है|

2 – किसी भी भाषा के अंतर्गत एक या अधिक बोलियाँ हो सकती हैं लेकिन किसी भी बोली के अंतर्गत एक या अधिक भाषा नहीं हो सकतीं है।

3 – बोली की उत्पत्ति भाषा से हो सकती है लेकिन किसी भी भाषा की उत्पत्ति बोली से नहीं हो सकती है|

4 – बोली के क्षेत्र के मुकाबले भाषा का क्षेत्र बहुत ज्यादा व्यापक होता है।

5 – बोली में केवल मौखिक रूप देखने को मिलता है लेकिन भाषा में मौखिक और लिखितदोनों रूप मौजूद होते है|

6 – बोली केवल निश्चित क्षेत्र या सिमित लोगो के बीच में बोली जा सकती है लेकिन अगर बोली बोलने वाले इंसान को अपने क्षेत्र से बाहर के इंसानो से संवाद करने के लिए भाषा का उपयोग करना पड़ता है|

7 – बोली का कोई मानक रूप नहीं होता है लेकिन भाषा का मानक रूप देखने को मिलता है|

भारत की राष्ट्र भाषा क्या है? / Bharat ki rashtrabhasha kya hai?

भारतीय संविधान में भारत की कोई राष्ट्र भाषा का उल्लेख नहीं किया गया है पैर बहुत सारे लोग हिंदी को भारत की राष्ट्रभासा मानते है क्युकि ये भारत में सबसे जयादा बोली जाने वाली भासा है।

निष्कर्ष –

हम आशा करते है की आपको हमारे लेख भाषा क्या है? (bhasha kya hai) भाषा के प्रकार में दी गई जानकारी आपको पसंद आई होगी| हमारे इस लेख को अधिक से अधिक शेयर करें, जिससे हमारा यह पेज ऐसे लोगो के पास तक पहुँच जाएं जिन्हें भाषा में जानकारी नहीं है|

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